'विजयानंद' (2022) की कहानी पद्म श्री डॉ. विजय संकेश्वर के असाधारण जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक जीवनी (बायोपिक) है। यह फिल्म एक साधारण व्यक्ति के उत्तर कर्नाटक से भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स साम्राज्य, VRL मीडिया के मालिक बनने तक के सफर को दर्शाती है।

कहानी 1969 में गदग से शुरू होती है। विजय संकेश्वर (निहाल राजपूत) अपने पिता बी.जी. संकेश्वर (अनंत नाग) के पारिवारिक प्रिंटिंग प्रेस व्यवसाय से अलग अपनी राह चुनते हैं। वह अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध एक नई प्रिंटिंग मशीन खरीदने के लिए कर्ज लेते हैं, जो उनके विद्रोही और दृढ़ निश्चयी स्वभाव को दर्शाता है।

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यह फिल्म द्वारा निर्देशित है और इसमें मुख्य भूमिका निहाल राजपूत ने निभाई है।

विजय हुबली शिफ्ट हो जाते हैं और कड़ी मेहनत से अपने व्यवसाय को भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल फ्लीट "VRL" में बदल देते हैं। उनका सफर केवल बिजनेस तक ही सीमित नहीं रहता; वे राजनीति में कदम रखते हैं और विधायक (MLA) बनते हैं।

यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने अपने सपनों के लिए जोखिम उठाया, समाज की परवाह किए बिना अपनी राह बनाई और आज हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। फिल्म में उनके पारिवारिक रिश्तों, विशेषकर अपनी पत्नी ललिता और बेटे आनंद संकेश्वर के साथ उनके जुड़ाव को भी खूबसूरती से दिखाया गया है।

विजय का असली सफर तब शुरू होता है जब वे एक पुरानी ट्रक के साथ परिवहन (ट्रांसपोर्ट) का व्यवसाय शुरू करते हैं। शुरुआती असफलताओं और वित्तीय बाधाओं के बावजूद, वे हिम्मत नहीं हारते। अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए वे गणेशमल शाह (वी. रविचंद्रन) से 20 लाख रुपये का ऋण लेते हैं और चार नए ट्रक खरीदते हैं।

अपनी साख और स्वाभिमान की रक्षा के लिए, वे अपना खुद का समाचार पत्र 'विजया वाणी' शुरू करते हैं, जो कर्नाटक का नंबर एक अखबार बन जाता है।