А¤®а¤ё А¤•ഇ А¤•ഝरഋध А¤•аґ‹ А¤•ഈसഇ А¤¶а¤ѕа¤‚त А¤•रഇ || — Man Ke Krodh Ko Kaise Shant Kare || Thakur Ji Maharaj

3. सहिष्णुता और क्षमा (Tolerance and Forgiveness)

मन के क्रोध को कैसे शांत करें? (How to Calm the Anger of Mind)

हमारा मन वैसा ही बनता है जैसा हम सुनते और देखते हैं। प्रतिदिन ठाकुर जी महाराज जैसे संतों का सुनने से बुद्धि में विवेक जाग्रत होता है। विवेक हमें यह सोचने की शक्ति देता है कि "क्या यह बात गुस्सा करने के लायक है?" निष्कर्ष

क्रोध का मुख्य कारण यह है कि हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे हिसाब से चले। ठाकुर जी समझाते हैं कि सामने वाले को उसकी गलतियों के साथ स्वीकार करना ही 'क्षमा' है। यह याद रखें कि जो व्यक्ति गुस्सा कर रहा है, वह मानसिक रूप से बीमार है। रोगी पर गुस्सा नहीं, दया की जाती है।

क्रोध एक ऐसी अग्नि है जो दूसरे को जलाने से पहले खुद को जलाती है। हम अक्सर छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो देते हैं, जिसका परिणाम बाद में पछतावा होता है। के अनुसार, क्रोध कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि हमारे मन की एक दुर्बलता है।